
विपणन प्रबंधन दर्शन (Marketing Management Philosophies) संगठनात्मक उद्देश्यों की उपलब्धि का आसानी से वर्णन करता है। ये दर्शन 18th और 19th शताब्दी के मध्य में हैं। यह पहली बार औद्योगिक क्रांति के दौरान हुआ था।
दर्शन (Marketing Management Philosophies) चार प्रकार के होते हैं जो इस प्रकार हैं:
यह अवधारणा इस धारणा पर काम करती है कि उपभोक्ता ऐसे उत्पाद को पसंद करते हैं जो उपलब्ध और सस्ता हो। जिसका अर्थ है 'आपूर्ति अपनी मांग खुद बनाती है'। इसलिए, कंपनियां उत्पाद के अधिक उत्पादन पर ध्यान केंद्रित करती हैं और यह सुनिश्चित करती हैं कि यह ग्राहक को हर जगह आसानी से उपलब्ध हो।
पैमाने की अर्थव्यवस्थाओं का लाभ उन कंपनियों द्वारा लिया जाता है जहां ये उत्पाद के अधिक उत्पादन पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। दूसरी बात, हम उत्पादन लागत में कमी करके उत्पाद को सस्ता और ग्राहक के लिए आकर्षक बना सकते हैं।
एक न्यूनतम कीमत नए ग्राहकों को आकर्षित कर सकती है, लेकिन ध्यान सिर्फ उत्पादन पर है न कि उत्पादों की गुणवत्ता पर। परिणामस्वरूप बिक्री में कमी आती है यदि उत्पाद निशान तक नहीं है या ग्राहक की मांग के अनुसार है।
2. उत्पाद की अवधारणा (Product Concept):
यह अवधारणा इस धारणा पर काम करती है कि ग्राहक बेहतर गुणवत्ता और उपलब्धता के उत्पादों को पसंद करते हैं। कंपनी मुख्य रूप से अपना अधिकांश समय अधिक गुणवत्ता वाले उत्पाद को विकसित करने में लगाती है जो आमतौर पर महंगी कीमतों में बदल जाता है। उत्पाद में अधिक सुविधाओं के साथ अच्छी गुणवत्ता वाले उत्पाद प्रदान करना उत्पाद अवधारणा का मुख्य फोकस है।
"आपके पास जो है उसे बेचना" केवल विक्रय अवधारणा का मुख्य कार्य और उद्देश्य है। इसमें ग्राहक को विक्रेता द्वारा उत्पाद खरीदने के लिए आश्वस्त किया जाता है (अर्थात उत्पाद को हुक या बदमाश द्वारा बेचा जाता है। इसमें बिक्री ग्राहकों की आवश्यकताओं पर ध्यान केंद्रित नहीं करती है। केवल एक बार ग्राहक को आश्वस्त किया जा सकता है, यह करता है) इसका मतलब यह नहीं है कि हर बार विक्रेता अपने ग्राहक को उसके अनुसार ढाल सकता है इसलिए फर्म कम और साथ ही लंबे समय तक सफल नहीं हो सकती हैं।
ग्राहक की आवश्यकताओं और चाहतों को समझना मार्केटिंग अवधारणा का मुख्य उद्देश्य है। ग्राहकों को संतुष्ट करना इस अवधारणा का एक महत्वपूर्ण कार्य है। फर्म ग्राहकों के साथ निकट संपर्क पर ध्यान केंद्रित करती है ताकि उनकी जरूरतों को पूरा किया जा सके और फिर उसी के अनुसार ग्राहकों को उत्पाद पेश किए जा सकें।
"प्रतिस्पर्धियों की तुलना में लक्ष्य बाजार को सर्वोत्तम तरीके से संतुष्ट करना" मार्केटिंग अवधारणा का एजेंडा है।
5. सामाजिक अवधारणा (Societal Concept):
समुदाय/समाज की नैतिक सीमाओं के भीतर ग्राहकों की संतुष्टि सामाजिक अवधारणाओं का मुख्य कार्य है। इस अवधारणा में हानिकारक और अनुचित व्यापार प्रथाओं से बचा जाता है। यह अवधारणा उन वस्तुओं के उपयोग को रोकने पर केंद्रित है जिनका हानिकारक प्रभाव आदि हो रहा है।
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व्यावसायिक अध्ययन शिक्षक (Business Studies Educator)
श्रीमती अमनप्रीत कौर (Mrs. Amanpreet Kaur) के पास BBA और MBA की डिग्री है और उन्हें व्यावसायिक अध्ययन (Business Studies) सिखाने का 10 से अधिक वर्षों का अनुभव है।
इस लेख में "4 Important Marketing Management Philosophies - In Hindi" को विस्तार से समझाया गया है, जिसमें परिभाषाएं, अवधारणाएं, मुख्य नियम और Hindi से संबंधित महत्वपूर्ण विवरण शामिल हैं।
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